झूठों के सारे झूठ भी नहले निकल गए
साहब हमारे दहलों के दहले निकल गए
फर्जी जो निकली डिग्री तो है शर्म की क्या बात
वादे भी तो सारे उनके जुमले निकल गए।
एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे। बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए लेकिन मन की ...
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