झूठों के सारे झूठ भी नहले निकल गए
साहब हमारे दहलों के दहले निकल गए
फर्जी जो निकली डिग्री तो है शर्म की क्या बात
वादे भी तो सारे उनके जुमले निकल गए।
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...
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