शुक्रवार, 8 मई 2026

 एक दिन बहुत पछताओगे 

ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में 

बैठे कहीं एकांत में 

किसी कविता के तुकांत में 

खुद आगे करोगे हाथ 

पाने को थोड़ा साथ

पर कहीं नहीं पाओगे 

एक दिन बहुत पछताओगे

रविवार, 3 मई 2026

मिसरा

 फूल भीतर शूल भी हैं 

गुलाब संग बबूल भी हैं 

दिखते जो रिश्ते सरल

चुभते त्रिशूल भी हैं।

 एक दिन बहुत पछताओगे  ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में  बैठे कहीं एकांत में  किसी कविता के तुकांत में  खुद आगे करोगे हाथ  पाने को थोड़ा साथ प...