असित नाथ तिवारी की कविताएं
फूल भीतर शूल भी हैं
गुलाब संग बबूल भी हैं
दिखते जो रिश्ते सरल
चुभते त्रिशूल भी हैं।
फूल भीतर शूल भी हैं गुलाब संग बबूल भी हैं दिखते जो रिश्ते सरल चुभते त्रिशूल भी हैं।