एक दिन बहुत पछताओगे
ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में
बैठे कहीं एकांत में
किसी कविता के तुकांत में
खुद आगे करोगे हाथ
पाने को थोड़ा साथ
पर कहीं नहीं पाओगे
एक दिन बहुत पछताओगे
स्वांग कान्हा का किया तो राधिका का त्रास होगा प्रीत में जो छल किया तो कृष्ण का उपहास होगा। असित नाथ तिवारी