वो जो किसी दिन तुम्हें चुभा होगा
देखना गौर से वो टूटा होगा
बिखर जाने का लिए मलाल वो
भरी महफ़िल में भी तन्हा होगा।
वो जो किसी दिन तुम्हें चुभा होगा
देखना गौर से वो टूटा होगा
बिखर जाने का लिए मलाल वो
भरी महफ़िल में भी तन्हा होगा।
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...