असित नाथ तिवारी की कविताएं
फूल भीतर शूल भी हैं
गुलाब संग बबूल भी हैं
दिखते जो रिश्ते सरल
चुभते त्रिशूल भी हैं।
एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे। बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए लेकिन मन की ...
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