असित नाथ तिवारी की कविताएं
फूल भीतर शूल भी हैं
गुलाब संग बबूल भी हैं
दिखते जो रिश्ते सरल
चुभते त्रिशूल भी हैं।
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...
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