कभी राम की आड़ में
कभी पाकिस्तान की आड़ में
वो चुनाव ही लड़ता है
मुसलमान की आड़ में;
कहता था कि दिखाएंगे
लाल आंखें चीन को
अब नैन मटक्का करने लगा
ट्रंप पहलवान की आड़ में।
जीवन कितना रीत गया बीते कई बासंती मौसम पतझड़ में सब बेरंग-बेरंग अंग-अंग तेरे रंग ना लागा ये फागुन भी बीत गया जीवन कितना रीत गया।
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