गुरुवार, 18 सितंबर 2025

मिसरा

 कभी राम की आड़ में 

कभी पाकिस्तान की आड़ में 

वो चुनाव ही लड़ता है 

मुसलमान की आड़ में;


कहता था कि दिखाएंगे 

लाल आंखें चीन को

अब नैन मटक्का करने लगा 

ट्रंप पहलवान की आड़ में।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

फागुन

 जीवन कितना रीत गया  बीते कई बासंती मौसम पतझड़ में सब बेरंग-बेरंग अंग-अंग तेरे रंग ना लागा  ये फागुन भी बीत गया  जीवन कितना रीत गया।