असित नाथ तिवारी की कविताएं
कंठ थे अवरुद्ध लोचन गा रहे थे
दो हृदय विपरीत पथ पर जा रहे थे
कंठ थे अवरुद्ध लोचन गा रहे थे दो हृदय विपरीत पथ पर जा रहे थे