शुक्रवार, 6 मार्च 2026

फागुन

 जीवन कितना रीत गया 

बीते कई बासंती मौसम

पतझड़ में सब बेरंग-बेरंग

अंग-अंग तेरे रंग ना लागा 

ये फागुन भी बीत गया 

जीवन कितना रीत गया।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

छोटी सी प्रेम कहानी

 एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई  उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे। बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए  लेकिन मन की ...