सुनो हीरामन
सच पूछो तो
गिरमिटिया एक विथा कथा है
दी हुई दुनिया
दिया हुआ जीवन
हंसी के पीछे
छुपी व्यथा है
प्रेम-व्रेम का वहम ना पालो
भूख बड़ी है रोटी ढालो
अपनों से दूरी मजबूरी
प्रवासी एक सतत प्रथा है
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...