मंगलवार, 1 मई 2018

मिसरा

मेरे चाहने वालों मुझे एक काम करने दो
बहुत थक गया हूं मैं, थोड़ा आराम करने दो
मेरी आवाज़ से डरता है वो, शहंशाह-ए-मुल्क
अब मेरी खामोशियों से उसे कुछ देर डरने दो

शनिवार, 28 अप्रैल 2018

कौन था सबसे पहला प्यार

याद है तुमको पहला-पहला प्यार
बोलो मेरे यार
अंगुली पकड़ के दादी ने जब कदम चलाए पहली बार
और कंधे पर ले दादाजी जब लगे दिखाने ये संसार
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार
गोद उठाए चली थी दीदी, भईया ने थामे थे हाथ
चाचा लेकर टॉफी पहुंचे, बुआ खिलाए कर मनुहार
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार
पेट पर चढ़ के मां के कूदे, पापा बने घोड़ा सवार
मामा-मामी की पुचकार या नाना-नानी की दुलार
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार
छोटी हथेली में शक्कर भर ली और चुराए थे अचार
चाची ने जब कलफ डाल डालकर पहना दिए कुर्ता-सलवार
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार
कान खींच दिए कुतिया के, गली में खेले बिल्ली के संग
गइया के बछड़े संग खेला, तितली पकड़ी रंग-बिरंग
ताखे में गौरैया बोली, कोयल कूक करे पुकार
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार
गिल्ली-डंडा खेले जिन संग, छुपम-छुपाई के सब यार
पहली कक्षा के साथी सब या दसवीं के राजकुमार
इंटर वाली गोरी सुंदरी या बीए वाली सायकिल सवार
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार
रिश्तेदारी वाला गबरु या पड़ोस का पढ़ाकू कुमार
घर आता-जाता कोई या दूर का कोई राज़दार
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार
दफ्तर मे जिसकी खातिर पहुंचे
मेले में था इंतजार
मॉल-मार्केट साथ घूमे थे,मूवी देखी थी कई बार
या फिर जो हर मुश्किल में था साथ
साथ रहा दुख-दर्द में जो
बोलो कौन था सबसे पहला प्यार

गुरुवार, 29 मार्च 2018

चंदा मामा कभी ना आया

चंदा मामा आएगा, दूध-भात लाएगा
चांदी के चम्मच से तुझको खिलाएगा
माई ने कह दिया, गुनगुनाते रहे हम
माड़, भात, नूून खाते रहे हम
माटी के चूल्हे पर तसला चढ़ाती थी
पानी खदकने पर खीर बताती थी
खीर के सपने सजाते रहे हम
माड़, भात, नून खाते रहे हम
माई ने आंचल को कंबल बताया था
माघ के पाला में उसको ओढ़ाया था
साड़ी को गद्दा समझाते रहे हम
माड़, भात, नून खाते रहे हम
आंखों के आंसू वो हमसे छुपाती थी
पानी में नून डाल हमको पिलाती थी
शर्बत समझ जीभ चटखाते रहे हम
माड़, भात, नून खाते रहे हम
माई ने माड़ पिया, भात नहीं खाया
माई ने भात खाया नून नहीं मिलाया
माई का स्वाद जान इतराते रहे हम
माड़, भात, नून खाते रहे हम

बुधवार, 28 मार्च 2018

मिसरा-03


जो आंखों में थे सारे आंसू ही तो थे
जो सूख गए उन्हें दरिया नहीं माना जाता
ग़मों को गीत में बदल गुनगुना लेते हैं
हमसे मुफलिसी का रोना रोया नहीं जाता
वो होंगे और जो रोज़ बदलते हैं चेहरे
हम शायर हैं हमें सियासी नुस्खा नहीं आता

मिसरा-02


यहां तक आते-आते सूख जाती हैं सारी नदियां
और आंखों का पानी भी सूख जाता है
मैं प्यासा खड़ा रहा लहरों की उम्मीदों में
सूखे दरख्तों ने बताया यहां समंदर भी सूख जाता है

मिसरा-01


मोहब्बत करने वालों में किसने नफरत फैलाई है
जली बस्तियां पूछ रहीं हैं किसने आग लगाई है
राख-खाक में जो भी बदला वो भी तेरा हिस्सा था
राम-खुदा तू जो भी है तेरी दुनिया बलवाई है

गुरुवार, 22 मार्च 2018

लोकतंत्र का जमूरा


जमूरा फिर से आएगा
नाग फिर फन लहराएगा 2
वो काली चादर फैलाएगा
वो फिर जुमले दोहराएगा 2
जमूरा फिर से आएगा
नाग फिर फन लहराएगा
चलेगा फिर वो टेढ़ी चाल
छोड़ेगा फिर वो केंचुल-खाल
उसे बस सत्ता की है भूख
खोलगा फिर से वो संदूक
जुबां पर बारूद और बंदूक
हमें वो फिर से डराएगा
जमूरा फिर से आएगा 2
नाग फिर फन लहराएगा
कि जिसकी लाठी उसकी भैंस
दिखाएगा हमको वो तैश
जो बिकेंगे उनके लिए है कैश
जो बचेंगे उनको धर्म की गैस
वो हमें आपस में लड़ाएगा
हमारा घर गिरवाएगा
जमूरा फिर से आएगा
नाग फिर फन लहराएगा
सुनो ऐ देशभक्त लोगों
बनो मत उनके तुम प्यादों
तुम्हारे नेक इरादे हों
सच्चे अपने वादे हों
ये वादा अपनों खातिर हो
देश के सपनों खातिर हो
देश तुम्हारा है प्यारों
बचा लो इसको अब न्यारों
जमूरा तमाशा बना देगा
तुम्हारी हस्ती मिटा देगा
आपस में लड़ना छोड़ो मित्र
गढ़ो एक राष्ट्र का चरित्र
देश फिर मुस्कुराएगा
जमूरा फिर ना आएगा-2



छोटी सी प्रेम कहानी

 एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई  उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे। बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए  लेकिन मन की ...