शनिवार, 12 सितंबर 2026

छोटी सी प्रेम कहानी

 एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई 

उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे।

बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए 

लेकिन मन की स्मृतियों को नैनन से हम चूम रहे।

एक छोटी सी प्रेम ...

प्रणय काल के बीते दिन में जब तुम मन की रानी थी

अपने मन का मैं राजा था तुम मीरा सी दीवानी थी;

उन सपनों को जिन अपनों को अपना मैंने समझा था

छलिया जग से छल पाकर मस्ती में हम झूम रहे।

एक छोटी सी प्रेम कहानी...

एक पात्र, जो तुम भी थे उस छोटी प्रेम कहानी में 

खुशियों से अब चहक रहे हो वैभव की बागवानी में;

इस वैभव का उस फक्कड़़पन से कोई तोल नहीं 

जहां स्वर्ण मृग नाच रहे हों वहां प्रेम का मोल नहीं।

हम अपने बेगानेपन को अपनेपन में ढाल रहे

तेरे दामन में खुशियां हों और रिश्तों की धूम रहे।

एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई 

उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे।

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छोटी सी प्रेम कहानी

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