असित नाथ तिवारी की कविताएं
एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई
उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे
सूखल घाट, तलइया सूखल
सूखल हमरी अंजुरी
कि बदरी आवऽऽ हमरी नगरी
कि गगरी रहिया ताके ना।
एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे