बुधवार, 31 जनवरी 2018

लोहा-लाठी

बा-अदब, बा-मुलाहिजा होशियार
देश भर के लेखक-पत्रकार लिखना-बोलना छोड़ दें
छोड़ दें वो सच का साथ, संस्कृति का हाथ
हुक्काम का फरमान है, मानना होगा
नहीं माने तो लटकाए जाओगे सलीब पर
कूंच दिए जाओगे ईंट-पत्थरों से
भारत में उनका वाला 'राष्ट्रवादी कानून' लागू हो गया है
संविधान 'साहब' के कबाड़खाने में फेंक दिया गया है।

रविवार, 28 जनवरी 2018

सारा हिंदुस्तान जलेगा !

फकत वोट की खातिर सारा हिंदुस्तान जलेगा

कहीं चंदन मरेगा, कहीं पहलू खान मरेगा

मस्जिद गिरेगी कहीं, कहीं मंदिर ढहेगा

मरेगी इंसानियत, कहीं ईमान जलेगा

फकत वोट की खातिर सारा हिंदुस्तान जलेगा

कहीं चंदन मरेगा, कहीं पहलू खान मरेगा

गीता जलेगी कहीं, कहीं कुरान जलेगा

ममता जलेगी कहीं, कहीं सुहाग जलेगा

जल जाएंगे सपने, रिश्ते भी जलेंगे

कहीं बस्तियां जलेंगी, कहीं इंसान जलेगा

फकत वोट की खातिर सारा हिंदुस्तान जलेगा

कहीं चंदन मरेगा, कहीं पहलू खान मरेगा

खेत जलेंगे, कहीं खलिहान जलेगी

भगत-अशफाक की शहादत भी जलेगी

पुरखों का दिया हर निशान जलेगा

फकत वोट की खातिर सारा हिंदुस्तान जलेगा

कहीं चंदन मरेगा, कहीं पहलू खान मरेगा

कभी संसद भी जलेगी, कहीं संविधान जलेगा

बुनियाद जलेगी, कहीं मचान जलेगा

नदियां भी जलेंगी, दरिया भी जलेगा

मजहब भी जलेगा, कहीं धर्म जलेगा

कब्रें भी जलेंगी, कहीं श्मसान जलेगा

फकत वोट की खातिर सारा हिंदुस्तान जलेगा

कहीं चंदन मरेगा, कहीं पहलू खान मरेगा











सोमवार, 15 जनवरी 2018

किस ओर...

इंसान चला, किस ओर चला ?
जग के बंधन को तोड़ चला
सारे संस्कार को छोड़ चला
इंसान चला, किस ओर चला ?

यूं चला कि जैसे नर पिशाच
कर आदमखोर सा नंगा नाच
सारे जग को यह मोड़ चला
इंसान चला, किस ओर चला ?

शैतानों से कर कदम-ताल
हैवानों सा होकर बेहाल
इंसानीयत को छोड़ चला
इंसान चला, किस ओर चला ?

बिन कौड़ी मिलता प्रेम जहां
ममता स्नेह का खेल जहां
उस बस्ती को झकझोर चला
इंसान चला, किस ओर चला ?

सुख-चैन छोड़ ये नाग रूप
सौंदर्य त्याग, ऐसा कुरूप
ले लाशों का लाख-करोड़ चला
इंसान चला, किस ओर चला ?

नोचे अपने ही पूतों का
ललकार रहा यमदूतों को
यमराज को पीछे छोड़ चला
इंसान चला, किस ओर चला ?

ले कंधे पर अपने देवालय
मरघट में जाकर छोड़ चला
इंसान चला, किस ओर चला ?

यही तो मैंने चाहा था

यही तो मैंने चाहा था
तुम संबल बन हिम्मत दोगी
दुर्गम पथ को सरल करोगी
विघ्नों में साथ निभा मुझको
संग्राम सफल का अवसर दोगी
तुमसे जीवन के रंग भरूंगा
सपने यही सजाया था
बस यही तो मैंने चाहा था

पर तुमने तो विषाद भर दिया
जीना ही दुश्वार कर दिया
छोड़ लहरों के बीच अकेला
हाथों से पतवार हर लिया
बुझा दिया वो दीपक खुद ही
जिसे बन बाती स्वयं जलाया था
क्या यही तुमने चाहा था ?

वर्षा रानी

हुमड़-घुमड़ अम्बर तन गर्जन छोड़ वर्षा तू आ जा
प्यासा मन, व्याकुल चितवन शीतल तृप्त करा जा

झम-झम, हहर-हहर तू बरसो वर्षा रानी
जीवन के शत शुष्क भाव को कर दो पानी-पानी

रूखे-सूखे काल खंड में हरियाली तू भर दे
तोड़ बांध, सीमाएं, घट-पट चल स्वच्छंद तू कर में

गंगा की लहरें बन जा और यमुना की धारा
जीवन के शत-शत प्रवाह की छू ले घाट किनारा

वेग भला तेरा कौन रोके, किसमें इतना दम है
धरा, गगन, पर्वत के तन सब तेरे ही हमदम हैं

सागर की लहरों में लहरे तेरी विजय पताका
तेरे जैसा दानवीर कौन, कौन है ऐसा दाता

छोड़ गर्जना अब तो तू बस आ ही जा अब आ जा
प्यासा मन, व्याकुल चितवन शीतल तृप्त करा जा

रविवार, 14 जनवरी 2018

कोहरा

सूरज सांसें रोक रहा है
आसमान भी अनमना है
कोहरा घना है 
राहें ओझल-ओझल सी हैं
आहें बोझिल-बोझिल सी हैं
सिमट रहे अलाप मन के
कोहरा न जाने किसने जना है
कोहरा घना है
कोहरे में डूबे में दिग-दिगंत
इस कोहरे का आदि न अंत
सिमट रहे संबंध विस्तार
सच है, सच कहना मना है
कोहरा घना है

एक टीस है

अबकी बिछड़े तो शायद ही मिल पाएंगे
ये जीवन है व्यापार नहीं
इस पार नहीं, उस पार नहीं
जो डूब गया वो डूब गया
फिर धार नहीं, मंझधार नहीं
फिर यादों के कोनों-कोनों में
हम आएंगे और जाएंगे
अबकी बिछड़े तो शायद ही मिल पाएंगे 

जो छोटी-छोटी बातों की गंठरी से गांठ बना बैठे
कुछ निज स्वारथ के चक्कर में फिरते हैं ऐंठे-ऐंठे
कुछ अहंकार का चक्कर है, कुछ मूढ़ मति का दुष्प्रभाव
कुछ खुशफहमी ने मारा तो कुछ समझ फेर का है प्रभाव
यूं तो तिरते-तिरते एक दिन सब रेत फिसल जाएंगे
अबकी बिछड़े तो शायद ही मिल पाएंगे 

अबकी का बिछड़ना अलग राह पर चलना होगा
मंजिलें अलग होंगी, करवां बदलना होगा
फिर न कोई सिरा होगा, न छोर मिलेगा कोई
फिर न कोई ख़बर होगी न ओर मिलेगा कोई
अबकी फासले हमारे इस कदर बढ़ जाएंगे
अबकी बिछड़े तो शायद ही मिल पाएंगे 

छोटी सी प्रेम कहानी

 एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई  उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे। बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए  लेकिन मन की ...