बुधवार, 31 जनवरी 2018

लोहा-लाठी

बा-अदब, बा-मुलाहिजा होशियार
देश भर के लेखक-पत्रकार लिखना-बोलना छोड़ दें
छोड़ दें वो सच का साथ, संस्कृति का हाथ
हुक्काम का फरमान है, मानना होगा
नहीं माने तो लटकाए जाओगे सलीब पर
कूंच दिए जाओगे ईंट-पत्थरों से
भारत में उनका वाला 'राष्ट्रवादी कानून' लागू हो गया है
संविधान 'साहब' के कबाड़खाने में फेंक दिया गया है।

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मिसरा

 एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई   उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे