रविवार, 6 जनवरी 2019

यादें


जब रात को सूरज खो जाता है
फिर चांद कहीं जा सो जाता है
इक हूक सी दिल में उठती है
दो आंखें नदियां हो जाती हैं
पर याद तेरी ना जाती है

फिर तारे सारे खो जाते हैं
पंछी नभ में फिर गाते हैं
उम्मीदों का सूरज आता
कलियां भी खिल जातीं हैं
पर याद तेरी ना जाती है

मिसरा

दामन मेरा कभी आंसुओं से नम नहीं हुआ
दुनिया समझती रही कि मुझे ग़म नहीं हुआ
होठों पे ताउम्र जिनके बद्दुआ रही
इश्क़ उनसे भी हमारा कम नहीं हुआ

शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

प्रेम अमर है


दो नयन मिले, दो दिल धड़के
दो भौंरों का गुनगुन गान हुआ
जो राधा की भक्ति समझ गया
वो मीरा का विषपान हुआ
संगम की ऐसी धारा का ये
गंगा-जमुना सा पानी है
जब से धरा-गगन हैं ये
तब की ये अमर कहानी है-2

जब फूल खिले उपवन में तो
जब धानी मंजरियां इठलाई थीं
जब प्रेम पद स्पर्श पाकर
हो जीवित अहिल्या इतराई थी
धरती की प्यास बुझाने को
जब से गगन धाम में पानी है
अरे, जब से धरा-गगन हैं ये
तब की ये अमर कहानी है-2

बादल-सागर से शुरू हुई
आदम-हव्वा का रूप लिया
राधा के नयनों से टपकी
जैनब-अबुल ने रोक लिया
खुसरो के सपनों में आई
लैला-मजनू की बलिदानी है
अरे, जब से धरा-गगन हैं ये
तब की ये अमर कहानी है-2

पथिक प्रेम का तुम बनना
संयम की गरिमा साथ रहे
नफरत का सागर सूखेगा
बस हांथों में तेरा हाथ रहे
कलियों पर भौंरों का दीवानापन
जीवन की असल निशानी है
अरे, जब से धरा-गगन हैं ये
तब की ये अमर कहानी है-2

बुधवार, 2 जनवरी 2019

अच्छा लगता है


 देख मुझे तेरा शर्माना अच्छा लगता है
आसपास यूं ही आ जाना अच्छा लगता है
मुझको तेरी फिक्र नहीं, ऐसा कहना ठीक नहीं
मेरी बातों पर तेरा मुस्काना अच्छा लगता है

मेरी फिक्र तुझे भी होगी, यादें भी आती होंगी
भोलेपन से वो भाव छुपाना अच्छा लगता है
चुपके से नजरें मिल जाना अच्छा लगता है
मुड़-मुड़ कर वो देख के जाना अच्छा लगता है
देख मुझे तेरा शर्माना अच्छा लगता है

पास बैठने को पल भर भी कई बहाने होते हैं
बिना बात के भी बतियाना अच्छा लगता है
कुछ पल साथ बिताए वो पल अच्छा लगता है
तिरछी नजरों का वही तराना अच्छा लगता है
देख मुझे तेरा शर्माना अच्छा लगता है

शाम को सूरज भी जाता है, बिछुड़न होती धरती से
लौट के कल वहीं आना है, अच्छा लगता है
मुझसे राग मिलेगा तेरा, नया तराना छेड़ेंगे
बिन गाए गीतों को सुनाना अच्छा लगता है
देख मुझे तेरा शर्माना अच्छा लगता है।

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

प्यार जिंदाबाद


ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद-2
नफरतों की आग पर पानी बना है तू
खंजरों की धार पर पानी फिरा दे तू
तेरे चमन में फूल हैं, खुशबू है बेहिसाब
ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद-2

इंसान को इंसान से कन्हैया बना दिया
रत्नाकर खुंखार को रचैया बना दिया
राधा अमर है और मीरा गा रही है आज
ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद 

प्यार जिनके पास था फूलों में खिल गए
तलवारें जिनके हाथ थीं,मिट्टी में मिल गए
पूछो ना वो चंगेज औ सकिंदर कहां हैं आज
ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद-2

वो नफरतों का बादशाह, हिटलर वो नाम था
आखिर वक्त में बंकरों में वो छुपा रहा
अपनी ही पिस्तौल ने कर दिया हिसाब
ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद-2

मुसोलिनी वो शख्स था पूजा गया था जो
नफरतों की आग में सोना बना था जो
वो लाश लटकी ही पड़ी थी, थीं चोटें बेहिसाब
ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद-2

तू भूल मत सद्दाम का वो हश्र याद कर
सन्डास में पड़ा था वो मुंह छुपा कर
जिन नफरतों को बोया था, वो ही रहीं थी मार
ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद-2

तू कृष्ण को तो देख, दुशासन तो ना तू बन
तू राम का गर भक्त है, रावण तो ना तू बन
तू नफरतों की आग से अहिल्या को ना जला
तू बुद्ध की संतान है, महावीर का औलाद
ऐ यार जिंदाबाद, है प्यार जिंदाबाद-2

बुधवार, 5 दिसंबर 2018

मजहब का कारोबार

आपको भरमाने से उनका कारोबार चलता है
बस्तियां जलाने से उनका कारोबार चलता है
धर्म और मजहब बस धंधा है जिनकी खातिर
दंगे भड़काने से उनका कारोबार चलता है

लब खोल कि सन्नाटा टूटे

गहरे सन्नाटे चीख रहे हैं
खामोश जबां को खींच रहे हैं
देख के चुप्पी ऐसी अब वो
अपनी आंखें भींच रहे हैं
दर-दर बलवाई का डेरा
घर-घर दहशत ने है घेरा
आग-आग और राख-राख में
बारुदों को सींच रहे हैं
ये जो चंद दंगाई हैं
मुट्ठी भर बलवाई हैं
सर कलम हमारा कर देंगे
आह भी हमें न भरने देंगे
ये चुप्पी हमारी उनकी हिम्मत
ये चुप्पी हमारी, उनकी दहशत
ये चुप्पी हमारी वहशत-वहशत
ये चुप्पी हमारी शातिर सी है
ये चुप्पी हमारी कातिल सी है
लब खोल कि आज़ादी आए
लब खोल कि खामोशी जाए
लब खोल कि दहशत डर जाए
लब खोल की वहशत मर जाए
लब खोल कि सन्नाटा टूटे
लब खोल कि खामोशी रूठे
लब खोल कि गुंडे डर जाएंगे
ये दहशत-वहशत मर जाएंगे
ये धर्म के ठेकेदार हैं जो
दुबकेंगे अपने घर जाएंगे
फिर कोई छप्पर ना फूंकी जाएगी
फिर कोई विधवा ना पछताएगी
फिर फूल चमन में आएंगे
हिंदू-मुस्लिम मोद मनाएंगे
बस एक बार तू चीख जरा
दहशतगर्दों को चीर जरा
ये चीख विजय को लाएगी
फिर भारत माता मुस्काएगी
....असित नाथ तिवारी...

छोटी सी प्रेम कहानी

 एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई  उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे। बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए  लेकिन मन की ...