दामन मेरा कभी आंसुओं से नम नहीं हुआ
दुनिया समझती रही कि मुझे ग़म नहीं हुआ
होठों पे ताउम्र जिनके बद्दुआ रही
इश्क़ उनसे भी हमारा कम नहीं हुआ
दुनिया समझती रही कि मुझे ग़म नहीं हुआ
होठों पे ताउम्र जिनके बद्दुआ रही
इश्क़ उनसे भी हमारा कम नहीं हुआ
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...
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