असित नाथ तिवारी की कविताएं
कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं
कितना नीर बहाऊं
तुमसे जब मैं कह नहीं पाया
किसको व्यथा सुनाऊं
एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे
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