शुक्रवार, 28 जून 2019

हम तो हारे

आंख झपकी नहीं, रात सोई नहीं
मुझसे मत जागने का सबब पूछिए
वो जो सोए शब भर बड़े चैन से
हम क्यों रोए ये हमसे मत पूछिए
आंख....


हम तो हारे, मोहब्बत की कब्र बन गए
ज़ख़्म उनका भी जल्दी भरेगा नहीं
हम तो उतनी मोहब्बत कहीं सींच दें
उनको मुझ सा मोहब्बत कोई करेगा नहीं
हम तो ....


कल को मेहंदी रचेगी जब हाथ में
रस्म हल्दी की जब भी की जाएगी

जोड़ा शादी का होगा जब सामने

मेरी तस्वीर आंखों में जी जाएगी
मेरे आंसू बनेंगे सैलाब जब
कौन डूबेगा हमसे ये मत पूछिए

कल....

आंख झपकी नहीं, रात सोई नहीं
मुझसे मत जागने का सबब पूछिए
वो जो सोए शब भर बड़े चैन से
हम क्यों रोए ये हमसे मत पूछिए

आंख....

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किसको व्यथा सुनाऊं

 कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं  कितना नीर बहाऊं  तुमसे जब मैं कह नहीं पाया  किसको व्यथा सुनाऊं