वक्त नहीं लगता है
भरोसा खोने में
जीवन बीत जाता है
मोतबर होने में
जिन्हें फिक्र नहीं
एहसास के समंदर की
वो क्या जानें, कितना
लहू बहता है रोने में
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें