रविवार, 7 जुलाई 2019

मैं यूं हीं बैठा तुमको निहारा करूं

मैं यूं हीं बैठा तुमको निहारा करूं
आंखों में मुझे तुम बसाया करो
उठ के जाने से तेरे बिखर जाता हूं
सामने से ना यूं तुम जाया करो

मैं यूं हीं बैठा तुमको निहारा करूं
आंखों में मुझे तुम बसाया करो

तेरी एक झलक जो मैं पा जाता हूं
ऐसा लगता चमन मेरे दामन में है
सारे ग़म को खुशी मैं बना जाऊंगा
सामने तुम मेरे मुस्कुराया करो

मैं यूं हीं बैठा तुमको निहारा करूं
आंखों में मुझे तुम बसाया करो-2


मेरे मन का पपीहा बन जाओ तुम
अपने गीतों में तुमको उतारूंगा मैं
मेरे होठों की सुमधुर बनो रागिनी
तेरे भावों को गीतों में गाऊंगा मैं
जग के सारे सितम यूं उठा लूंगा मैं-2
मेरी सांसों में तुम बस समाया करो

मैं यूं हीं बैठा तुमको निहारा करूं

आंखों में मुझे तुम बसाया करो-2




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किसको व्यथा सुनाऊं

 कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं  कितना नीर बहाऊं  तुमसे जब मैं कह नहीं पाया  किसको व्यथा सुनाऊं