उसने देखा नहीं यूं मंज़र होना
सूनी आंखों का समंदर होना
उसको गुमान है अपनी
चालाकियों पर
हमको आता है कलंदर होना
सूनी आंखों का समंदर होना
उसको गुमान है अपनी
चालाकियों पर
हमको आता है कलंदर होना
कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं कितना नीर बहाऊं तुमसे जब मैं कह नहीं पाया किसको व्यथा सुनाऊं
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