शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

मेघा

पपीहे की प्यास की आस है मेघा
धरा के सूखते कंठ की विश्वास है मेघा
इन्हीं काली घटाओं में कहीं घुल जाता मैं भी
आह, बिछुड़न की सबसे बड़ी संत्रास है मेघा.

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किसको व्यथा सुनाऊं

 कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं  कितना नीर बहाऊं  तुमसे जब मैं कह नहीं पाया  किसको व्यथा सुनाऊं