रविवार, 24 फ़रवरी 2019

गिरमिटिया

सुनो हीरामन
सच पूछो तो
गिरमिटिया एक विथा कथा है

दी हुई दुनिया
दिया हुआ जीवन
हंसी के पीछे
छुपी व्यथा है

प्रेम-व्रेम का वहम ना पालो
भूख बड़ी है रोटी ढालो
अपनों से दूरी मजबूरी
प्रवासी एक सतत प्रथा है

1 टिप्पणी:

  1. कैसे बया करे अपने ही लब्जो से अपनो के बारे में जिन्होंने इतने ताने मारे रोटी के लिए खुद बेबस होके जाना पड़ा रोटी को कमाने

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किसको व्यथा सुनाऊं

 कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं  कितना नीर बहाऊं  तुमसे जब मैं कह नहीं पाया  किसको व्यथा सुनाऊं