शुक्रवार, 8 मई 2026

 एक दिन बहुत पछताओगे 

ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में 

बैठे कहीं एकांत में 

किसी कविता के तुकांत में 

खुद आगे करोगे हाथ 

पाने को थोड़ा साथ

पर कहीं नहीं पाओगे 

एक दिन बहुत पछताओगे

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मिसरा

 एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई   उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे