असित नाथ तिवारी की कविताएं
वो जो किसी दिन तुम्हें चुभा होगा
देखना गौर से वो टूटा होगा
बिखर जाने का लिए मलाल वो
भरी महफ़िल में भी तन्हा होगा।
जीवन कितना रीत गया बीते कई बासंती मौसम पतझड़ में सब बेरंग-बेरंग अंग-अंग तेरे रंग ना लागा ये फागुन भी बीत गया जीवन कितना रीत गया।
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