मंगलवार, 18 जुलाई 2023

रब झूठा है

 तुमको खोकर जो भी पाया

सब झूठा है

सच कहता हूं रब झूठा है


जिनके सम्मुख जोड़े मैंने

हाथ प्रार्थनाओं में झुक कर

अश्रु से धोए मैंने जिनके चौखट

घंटों रुक कर

पत्थर से ज्यादा न निकले

मंदिर-मंदिर बैठे भगवान

मेरी आहें जब भी निकलीं

बहरे हो गए उनके कान

जानता हूं भाग्य मेरा मुझसे रूठा है

सच कहता हूं रब झूठा है 


पाषाणों ने सुनी ही कब है

प्रेम की पीड़ा, प्यार की भाषा

उन बहरे भगवानों से क्यों

पाले हृदय कोई अभिलाषा 

देवों आगे जो चढ़ता 

हर वो सिक्का खोटा है 

सच कहता हूं रब झूठा है।








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किसको व्यथा सुनाऊं

 कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं  कितना नीर बहाऊं  तुमसे जब मैं कह नहीं पाया  किसको व्यथा सुनाऊं