मुल्क में मेरे चुनाव की तैयारी हो रही है
सुना है चाकुओं की पसलियों से यारी हो रही है
वो बता रहे हैं कि जनहित में पाला बदल लिया
हमें मालूम है कि जनता से मक्कारी हो रही है।
कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं कितना नीर बहाऊं तुमसे जब मैं कह नहीं पाया किसको व्यथा सुनाऊं
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें