मुल्क में मेरे चुनाव की तैयारी हो रही है
सुना है चाकुओं की पसलियों से यारी हो रही है
वो बता रहे हैं कि जनहित में पाला बदल लिया
हमें मालूम है कि जनता से मक्कारी हो रही है।
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...
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