असित नाथ तिवारी की कविताएं
कैसे बया करे अपने ही लब्जो से अपनो के बारे में जिन्होंने इतने ताने मारे रोटी के लिए खुद बेबस होके जाना पड़ा रोटी को कमाने
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...
कैसे बया करे अपने ही लब्जो से अपनो के बारे में जिन्होंने इतने ताने मारे रोटी के लिए खुद बेबस होके जाना पड़ा रोटी को कमाने
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