कुछ पलाश हैं, कुछ महुआ है, कुछ बबूल हैं
अपने-अपने जीवन के अपने उसूल हैं
प्रेम रिक्त हृदय में ज्वाला कुंठा की
प्रेम सिक्त हृदय में टेसू के फूल हैं।
...असित नाथ तिवारी...
एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे
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