दो कदम और साथ दे दो
तो संभल जाऊंगा
मैं चराग हूं
तूफानों से लड़ जाऊंगा
मेरी चाहत है रौशनी
फैलाने की
मैं बाती की तरह तेरी खातिर जल जाऊंगा
एक दिन बहुत पछताओगे ढूंढोगे मुझे भीड़ में, नीड़ में बैठे कहीं एकांत में किसी कविता के तुकांत में खुद आगे करोगे हाथ पाने को थोड़ा साथ प...
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