दो कदम और साथ दे दो
तो संभल जाऊंगा
मैं चराग हूं
तूफानों से लड़ जाऊंगा
मेरी चाहत है रौशनी
फैलाने की
मैं बाती की तरह तेरी खातिर जल जाऊंगा
एक छोटी सी प्रेम कहानी जाने कब की खत्म हुई उसका पात्र बने अब तक जग में हम हैं घूम रहे। बीते दिन महीने बीते बरस-बरस भर बीत गए लेकिन मन की ...
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