शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

प्रेम और स्वार्थ

आंसुओं से पत्थर नम हुआ नहीं करते
इश्क़ करने वाले कभी बद्दुआ नहीं करते
जहां प्रेम हो वहां गलतफहमियां आ नहीं सकतीं
जहां स्वार्थ हो वहां प्रेम हुआ नहीं करते

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किसको व्यथा सुनाऊं

 कितनी पीड़ा ढो पाऊं मैं  कितना नीर बहाऊं  तुमसे जब मैं कह नहीं पाया  किसको व्यथा सुनाऊं