जीवन कितना रीत गया
बीते कई बासंती मौसम
पतझड़ में सब बेरंग-बेरंग
अंग-अंग तेरे रंग ना लागा
ये फागुन भी बीत गया
जीवन कितना रीत गया।
जीवन कितना रीत गया
बीते कई बासंती मौसम
पतझड़ में सब बेरंग-बेरंग
अंग-अंग तेरे रंग ना लागा
ये फागुन भी बीत गया
जीवन कितना रीत गया।
जीवन कितना रीत गया बीते कई बासंती मौसम पतझड़ में सब बेरंग-बेरंग अंग-अंग तेरे रंग ना लागा ये फागुन भी बीत गया जीवन कितना रीत गया।